Friday, 6 February 2009

के जितना ढूंढते हो तुम

के जितना ढूँढते हो तुम

उतना गुम नहीं हूँ मैं

बस कुछ नए हिस्सों में थोड़ा

बंट गया हूँ अब

अब भी रखता हूँ

नए वादे हथेली पे

अब भी नेजे पे सवालों के संभालता हूँ

अब ही तनहा चाँदनी में

खूब जलता हूँ

रोज जब तुम दस सवालों को उठाते हो

रोज मैं कुछ ख्वाब नन्हें

ढूंढ लाता हूँ

तुम जिन्हें मुश्किल बता कर रूठ जाते हो

मैं सौ दफा उन मुश्किलों में

सर उठाता हूँ

यहीं अक्सर

कहीं कुछ बीनता चुनता हुआ

देखो

यहीं मिल जाऊंगा मैं

जिंदगी बुनता हुआ देखो

जरा सा गौर से देखो

उफक के पास ही हूँ मैं

के जितना ढूंढते हो तुम

उतना गुम नहीं हूँ मैं

5 comments:

Dr. Virendra Singh Yadav said...

sundar soochana dene ke liye badhai ho.blog ki is duniya me apka swagat hai

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत ख्याल है.........
सुंदर रचना, अच्छी अभिव्यक्ति

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रचना गौड़ ’भारती’ said...

सुंदर रचना
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

नारदमुनि said...

kisi ke pyar me aadmi gum hosakta hai. gana bhee hai " gum hai kisi ke pyar me...." narayan narayan