Thursday, 25 September 2008

खोखली बातों को भरने का मजा देखें

क्यूँ नहीं तुम मान जाती हो
मेरी सब खोखली बातें
के जब तक
हम सफर में हैं
कोई तो राह चलनी है
तुम्हारे पास भी तकलीफ के काफ़ी बहाने हैं
जिन्हें तुम उँगलियों पर भी
गिना देती हो गुस्से में,
और जिनको
चुटकियों पर मैं बजाता हूँ बड़े मन से/
के अब इन
रोज़ के झगडों से हम
बस खेलते भर हैं
सफर ये रुक नहीं सकता है
इन छोटी दलीलों से
तुम्हें भी इल्म है इसका
मुझे भी जानकारी है .....
सफर में साथ हैं हम तुम
तो इतना तो यकीं भी है
के सूरज
ढल नहीं जायेगा
जल बुझ कर के कल परसों
जिसे अब हार कहते हैं
उसे तब जीत कह देंगे
के कुछ भी
तय नहीं है
अब तलक भी दरमियान अपने
किसे क्या नाम देना है
किसे क्या नाम देना है
के आओ
खोखली बातों को भरने का मजा देखें
के आओ
अपनी मर्ज़ी से गुजरने का मजा देखें

1 comment:

ranjit said...

bahut acha kawita thi, mere dil ko choo gai,
thank u mujhe yaad kiya